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Tuesday, 29 August 2017

रास में

रासेश्वर के रास में मूक बधिर मति होए
नाचे थिरके आत्मा 
सुरभित मनवा होय।
 राधे राधे श्याम गाओ 
कण कण में पाओ।

2 comments:

  1. प्रेम से प्रकटी राधे प्रेम का विस्तार सृष्टि प्रेम मय माधव मुरारि करते रहते प्रेम वृश्टि

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  2. आत्मारामी श्रीकृष्ण समाधिस्थ रहते हैं और जब शरारती भाव जागता है तो पहले हृदय से अपनी आह्लादिनी शक्ति राधा जी को प्रकट करते हैं मस्तिष्क से शिवजी दुर्गा जी को प्रकट करते हैं।

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