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Monday, 18 March 2013






छिप छिप कर मिलते हो ,
 मिल कर छिप जाते हो,
एक झलक दिखला  कर
ओझल   हो   जाते   हो .. 
कब तक नाच नचाओगे  
रास बिहारी ? 
कुछ तो रहम करो उन पर
जो शरण तुम्हारी.

3.4.11




देह राधा, आत्मा कान्हा हुए , प्रेम के सैलाब में पागल हुए !
कौन जीवन ?कौन मृत्यु? भेद छूटे,वेश छूटे एकानंद हुए! ,


17 May 2011







मैं क्यूँ बोलूँ ?
कहाँ अब भ्रान्ति कोई?
निशब्द होता है अहसास ,
जगे जब आत्मा सोई !23.4.11
प्राण तुम हो ज्ञान हो तुम मृत्यु तुम विश्राम  भी  तुम
तुम ही तुम हो श्याम श्वेता कृष्ण तुम हो राम भी तुम
4 May 2012





मौन भाषा है ह्रदय की,
   मौन में.... विश्राम..
     मौन ही ...आनंद है
        मौन में .....हैं राम !

12 May 2011

मैं माधव! मैं कृष्ण मुरारी !मैं ही जीवन! मैं ही वारि ! 
मुझ से विलग नहीं कुछ भी, मैं तो हूँ आत्मा तुम्हारी ! , 17 May 2011

Thursday, 14 February 2013

साक्षी सृष्टि चक्र का
मुझ से रहित न कोई
जाओगे छिप कर कहाँ
मुझ बिन कुछ न होई !