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Thursday, 21 August 2014

अंश राधाकृष्ण के

अंश राधाकृष्ण के
                    मस्ती में झूमें

सृष्टि  उनका   आँगना 
                   क्यों न फिर झूमें ?

Monday, 24 February 2014

राग ..

राधा मेरी रागिनी ..मैं हूँ उसका राग ..
हम दोनों है एक  ज्यूँ काष्ठ में आग ..

Friday, 27 December 2013

रास


 कृष्ण कृपा जब बरसती
                    सृष्टि रचाती रास
कृष्ण शरण में हम रहें
                       केवल इतनी आस

Friday, 1 November 2013

हरि आधार

रूप  सम्भव तभी  जब  तक हरि आधार
तुच्छ, हो या महिम हरि का सब व्यापार 

भार

भार वहन  करते हैं माधव
                       हलके रहते भक्त

न "तू" हो न "मैं" या "वह"
                         हों हरि में आसक्त 

रास

योगी रास रचातें पल पल
                   दुश्मन उनके रोयें
हरि के चाकर हरि रस पीके 

                     हर पल खुश होयें

रूप विराट

चाकर राधा माधव के - सृष्टि के सम्राट
रहें प्रेम से, निर्भय,देखें उनका रूप विराट