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Tuesday, 27 August 2013

जग के सपने ...

जितनी गोपी कृष्ण भी उतने
                             जितने जीव ब्रह्म भी उतने
                                             सृष्टि कहाँ है ब्रह्म बिना .... 
                                                             .हैं हरी देखते जग के सपने ...

जग ही उनका धाम

जिस के मन राधाकृष्ण
                   उसको किस से काम ?  
                                     धारक पालक तो वही
                                                     जग ही उनका धाम

Saturday, 3 August 2013

माधव मेरे !

22 July 2013 at 14:03
मुक्त करो, जग की कारा से, माधव मेरे !

जनम जनम तक भटके, अटके, धोखे खाते !

रह जाते हर  बार अधूरे ,फिर पछताते !

नैन मूंद बस ध्यायूं तुमको केशव मेरे !

पिता तुम्ही,माता  मेरी,गुरु के गुरु मेरे !

करो अनुग्रह अब तो, कृपा मेघ बन जाओ !
एक करो अपने से मुझ को न तरसाओ !

Wednesday, 31 July 2013

प्रेमियों के प्राण...

कृष्ण सा प्रेमी नहीं, धरती ने उपजा

                कृष्ण सा माधुर्य न, सृष्टि में बरसा

कृष्ण सृष्टि के प्रणेता , प्रेमियों के प्राण...

                    देह छोडी, बसे ह्रदय में, देने सब को त्राण..!

Monday, 18 March 2013

धुन

वंशी की धुन बाजती 
                प्रकृति के अनुरूप
कहलाओ चाहे कोई 
               नदिया ,धरती ,धूप19.4.12




बरबस खिंच जाते प्राण तुम्हारी दृष्टि से उन्मादित

 तन -मन विस्मृत अस्तित्व शेष बस हो जाता आह्लादित

मारुत से उड़ जाते उर में भर सुगंध सुमनों की ..!

कभी लहर  सा खेले जीवन गोदी में सागर की

 मृत्यु हो तुम या हो जीवन ,नहीं समझ में आया

कभी ह्रदय में बसे प्राण बन,कभी छीन ली काया!-----------------





योगेश्वर ने है दिया शोक निवारक योग .
सृष्टि के है मूल में आधेय- आधार .
प्रकृति के पीछे पुरुष. पुरुष -प्रकृति आधार
फल आधारित पुष्प पर, पल्लव पुष्प आधार .
पल्लव आश्रित शाख पर,तना शाख आधार.
मूल  आधार स्कंध की,बीज वृक्ष आधार .
बीज आधारित भूमि पर . भूमि परिक्रमा बाध्य .
करती पथ पर ही गमन ,सूर्य देव आराध्य .
ढूध-धवलता पृथक, अग्नि से ताप
जल -रस;प्रकृति -गंधमय,वायु सहित है भाप.
राधा -माधव एक हैं एक तत्व दो नाम .
शासक शासिता प्रेम बहे निष्काम .
आत्मा शाश्वत तत्व है ,रूप व्यक्त आधार.
नारी -नर दो बिम्ब हैं दोनों सृजन आधार .20.6.10